नमो शेतकरी + पीएम किसान = ₹12000 सालाना: महाराष्ट्र के किसान दोनों किस्त कैसे पाएं, स्टेटस चेक करें 2026

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महीने की शुरुआत होते ही महाराष्ट्र के लाखों किसानों के मन में एक ही सवाल घूमता है — किस्त आई या नहीं? कोई बैंक की लाइन में खड़ा होकर पासबुक अपडेट करवा रहा होता है, तो कोई बेटे से मोबाइल पर मैसेज चेक करवा रहा होता है। अगर आप भी इसी उधेड़बुन में हैं, तो एक अच्छी खबर है। महाराष्ट्र के किसान को एक नहीं, दो सरकारी योजनाओं का पैसा मिलता है — केंद्र की पीएम किसान और राज्य की नमो शेतकरी महासन्मान निधि। दोनों मिलाकर सालाना ₹12,000 सीधे आपके बैंक खाते में। यानी नमो शेतकरी पीएम किसान ₹12000 का यह जोड़ छोटे और सीमांत किसान के लिए साल भर में अच्छा-खासा सहारा बन जाता है। पर पैसा तभी आता है जब आपकी e-KYC पूरी हो, आधार बैंक से जुड़ा हो और रिकॉर्ड सही बैठें। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि दोनों योजनाएँ मिलकर ₹12,000 कैसे देती हैं, किसे लाभ मिलेगा, किस्त कब और कितनी आती है, स्टेटस कैसे चेक करें, e-KYC का पूरा तरीका, और अगर पैसा अटक जाए तो क्या करें।

नमो शेतकरी पीएम किसान ₹12000 का जोड़ कैसे बनता है

बात सीधी है। केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि यानी पीएम किसान से हर पात्र किसान को साल में ₹6,000 मिलते हैं। यह रकम ₹2,000 की तीन बराबर किस्तों में आती है। इसी के ऊपर महाराष्ट्र सरकार ने अपनी तरफ से नमो शेतकरी महासन्मान निधि योजना शुरू की, जो ठीक उतना ही — यानी सालाना ₹6,000, तीन किस्तों में — राज्य के खजाने से देती है। दोनों को जोड़ दीजिए तो एक किसान परिवार के हाथ में साल भर में ₹12,000 आ जाते हैं।

यहाँ सबसे राहत की बात यह है कि नमो शेतकरी का फायदा लेने के लिए आपको कहीं अलग से लंबा-चौड़ा फॉर्म नहीं भरना पड़ता। नियम साफ है — जो किसान पहले से पीएम किसान का लाभार्थी है, वह अपने-आप नमो शेतकरी के लिए भी पात्र मान लिया जाता है। राज्य सरकार वही डेटाबेस उठाती है और उसी आधार पर किस्त भेजती है। इसलिए अगर पीएम किसान का पैसा आपके खाते में आ रहा है, तो समझिए दूसरी योजना का दरवाज़ा भी आपके लिए पहले से खुला है।

किसे मिलेगा लाभ — पात्रता की शर्तें

अब सवाल उठता है, क्या हर किसान को यह पैसा मिलेगा? नहीं। इसकी कुछ शर्तें हैं जिन्हें समझना ज़रूरी है। मोटे तौर पर योजना उन छोटे और सीमांत किसान परिवारों के लिए है जिनके नाम पर खेती की ज़मीन दर्ज है। परिवार से मतलब पति, पत्नी और नाबालिग बच्चे। कुछ श्रेणियाँ इस दायरे से बाहर रखी गई हैं। नीचे दी शर्तें आपको जल्दी अंदाज़ा दे देंगी कि आप पात्र हैं या नहीं:

  • किसान के नाम पर खेती योग्य ज़मीन का भूमि रिकॉर्ड होना चाहिए।
  • आधार कार्ड होना और वही आधार बैंक खाते से DBT के लिए जुड़ा होना ज़रूरी है।
  • e-KYC पूरी होनी चाहिए — इसके बिना किस्त रुक जाती है।
  • आयकर भरने वाले, डॉक्टर-वकील-CA जैसे पेशेवर, सरकारी कर्मचारी और पेंशनभोगी (एक तय सीमा से ऊपर) आमतौर पर बाहर रखे जाते हैं।

मान लीजिए, नागपुर के पास एक छोटे गाँव के किसान रामभाऊ के नाम दो एकड़ ज़मीन है, आधार बैंक से जुड़ा है और e-KYC हो चुकी है — तो उन्हें दोनों योजनाओं का पूरा ₹12,000 सालाना बिना किसी रुकावट के मिलता रहेगा। लेकिन अगर उन्हीं की ज़मीन का रिकॉर्ड पिता के नाम पर अटका है और अभी उनके नाम ट्रांसफर नहीं हुआ, तो किस्त फँस सकती है।

नमो शेतकरी योजना में ऑनलाइन आवेदन कैसे करें? (रजिस्ट्रेशन)

यहाँ एक बात एकदम साफ समझ लीजिए, क्योंकि इसी पर सबसे ज़्यादा भ्रम फैलता है। नमो शेतकरी योजना के लिए कोई अलग ऑनलाइन आवेदन या रजिस्ट्रेशन नहीं करना पड़ता। राज्य सरकार सीधे पीएम किसान का डेटाबेस उठाती है — यानी जो किसान पहले से पीएम किसान में रजिस्टर्ड है, वह अपने-आप नमो शेतकरी का पात्र मान लिया जाता है। इसलिए अगर कोई वेबसाइट आपसे “नमो शेतकरी योजना का अलग फॉर्म” भरवाकर फीस माँगे, तो तुरंत सावधान हो जाइए।

तो फिर “ऑनलाइन आवेदन” का असली मतलब क्या है? इसका सीधा मतलब है — पीएम किसान में अपना नाम जुड़वाना। अगर आप अभी तक पीएम किसान के लाभार्थी नहीं हैं, तो रजिस्ट्रेशन का तरीका यह है:

  1. pmkisan.gov.in खोलिए और “Farmers Corner” में “New Farmer Registration” पर क्लिक कीजिए।
  2. ग्रामीण या शहरी रजिस्ट्रेशन चुनकर आधार नंबर, मोबाइल नंबर और राज्य (महाराष्ट्र) भरिए, फिर OTP से सत्यापन कीजिए।
  3. अपनी व्यक्तिगत जानकारी, ज़मीन का विवरण (खाता/गट नंबर) और बैंक खाते की जानकारी भरकर दस्तावेज़ अपलोड कीजिए।
  4. फॉर्म सबमिट कीजिए। सत्यापन के बाद आपका नाम लाभार्थी सूची में जुड़ जाता है और दोनों योजनाओं की किस्त आनी शुरू हो जाती है।

ऑनलाइन में दिक्कत हो तो नज़दीकी CSC (कॉमन सर्विस सेंटर) या कृषि कार्यालय से भी यह रजिस्ट्रेशन करवाया जा सकता है। आवेदन के लिए ज़रूरी दस्तावेज़ हैं — आधार कार्ड, बैंक पासबुक, 7/12 भूमि रिकॉर्ड, फार्मर आईडी और आधार से लिंक मोबाइल नंबर। पात्रता की शर्त भी याद रखिए: आपको महाराष्ट्र का निवासी और खेती योग्य ज़मीन का धारक होना चाहिए, आधार बैंक खाते से DBT के लिए जुड़ा हो; जबकि संस्थागत भूमिधारक, सरकारी कर्मचारी, आयकरदाता और उच्च-पेंशनधारी इस योजना से बाहर रखे गए हैं।

किस्त कितनी और कब आती है

दोनों ही योजनाओं में पैसा एक साथ पूरे साल का नहीं, बल्कि तीन बार में आता है। हर बार ₹2,000 — यानी पीएम किसान से ₹2,000 और नमो शेतकरी से ₹2,000, तीन-तीन किस्तों में। आम तौर पर राज्य सरकार कोशिश करती है कि नमो शेतकरी की किस्त पीएम किसान की किस्त के आसपास ही जारी हो, ताकि किसान को एक ही समय पर दोनों का लाभ महसूस हो। हाल में पीएम किसान की 23वीं किस्त जून 2026 के आसपास जारी हुई और उसी दौर में नमो शेतकरी की रकम भी nsmny.mahait.org के ज़रिए किसानों के खातों में भेजी गई।

अगली किस्त की सटीक तारीख पर बहुत यकीन से कुछ कहना ठीक नहीं, क्योंकि यह सरकारी घोषणा और बजट रिलीज़ पर निर्भर करती है। इसलिए किसी वॉट्सऐप फॉरवर्ड में लिखी “पक्की तारीख” पर आँख मूँदकर भरोसा मत कीजिए। ताज़ा और भरोसेमंद जानकारी के लिए आप नमो शेतकरी की अगली किस्त से जुड़ी अपडेट देखते रहिए, और पीएम किसान की तरफ का हाल जानने के लिए पीएम किसान किस्त अपडेट पढ़ लीजिए। इससे अफवाहों से बचे रहेंगे।

पीएम किसान का स्टेटस कैसे चेक करें

अपनी किस्त का हाल जानने के लिए इधर-उधर भटकने की ज़रूरत नहीं। पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट पर चंद मिनटों में लाभार्थी सूची और किस्त की स्थिति दोनों देखी जा सकती हैं। तरीका यह रहा:

  1. अपने मोबाइल या कंप्यूटर पर pmkisan.gov.in खोलिए।
  2. होम पेज पर “Beneficiary Status” या “Know Your Status” वाला विकल्प ढूँढिए।
  3. अपना रजिस्ट्रेशन नंबर या आधार नंबर डालिए और कैप्चा भरिए।
  4. OTP या सीधे बटन दबाते ही आपके सामने आ जाएगा कि कौन-सी किस्त कब आई और आगे का क्या स्टेटस है।
  5. अगर आपका नाम लाभार्थी सूची में है पर पैसा नहीं आया, तो वहीं e-KYC और आधार सीडिंग की स्थिति भी जाँच लीजिए।

यही पन्ना आपको बता देगा कि दिक्कत किस्त जारी होने में है या आपके अपने रिकॉर्ड में। यह जानकारी बहुत काम की है, क्योंकि इससे पता चल जाता है कि शिकायत कहाँ करनी है।

नमो शेतकरी का स्टेटस कैसे चेक करें

नमो शेतकरी योजना का अलग पोर्टल है। इसके लिए आपको nsmny.mahait.org पर जाना होगा। वेबसाइट खुलने के बाद “Beneficiary Status” जैसे विकल्प पर क्लिक कीजिए, फिर अपना पीएम किसान रजिस्ट्रेशन नंबर या आधार नंबर डालिए। कुछ ही पल में स्क्रीन पर दिख जाएगा कि राज्य की तरफ से आपकी कौन-सी किस्त जमा हुई और कोई किस्त लंबित तो नहीं। चूँकि यह योजना पीएम किसान के डेटा पर टिकी है, इसलिए दोनों पोर्टल पर आपकी जानकारी मिलती-जुलती दिखेगी।

अगर आप पिछली किस्तों का हिसाब मिलाना चाहते हैं, तो नमो शेतकरी योजना की 9वीं किस्त की पूरी जानकारी पहले से मौजूद है — वहाँ से आप समझ सकते हैं कि किस दौर में कितनी रकम आई थी। एक छोटी सलाह — स्टेटस चेक करते वक्त वही आधार या रजिस्ट्रेशन नंबर डालिए जो पीएम किसान में दर्ज है, वरना रिकॉर्ड मैच नहीं होगा।

e-KYC कैसे करें — किस्त की सबसे बड़ी शर्त

अगर सिर्फ एक चीज़ है जो सबसे ज़्यादा किसानों की किस्त रोकती है, तो वह है अधूरी e-KYC। सरकार ने इसे अनिवार्य कर दिया है, और बिना इसके अगली किस्त खाते में नहीं आएगी। अच्छी बात यह कि इसे करने के तीन आसान रास्ते हैं। पहला — pmkisan.gov.in पर जाकर OTP आधारित e-KYC, जहाँ आपके आधार से जुड़े मोबाइल पर एक OTP आता है और बस वही डालना होता है। दूसरा — अगर मोबाइल नंबर आधार से लिंक नहीं है, तो पीएम किसान का Face Authentication ऐप डाउनलोड कर चेहरे से पहचान करके e-KYC पूरी की जा सकती है। तीसरा — नज़दीकी CSC यानी कॉमन सर्विस सेंटर पर जाकर फिंगरप्रिंट (बायोमेट्रिक) से भी यह काम हो जाता है।

घर बैठे मोबाइल से यह कैसे करना है, इसका पूरा step-by-step तरीका जानने के लिए पीएम किसान e-KYC कैसे करें वाला लेख पढ़ लीजिए — उसमें स्क्रीन-दर-स्क्रीन बताया गया है। एक बार e-KYC हो जाए, तो हर साल दोबारा करने की ज़रूरत आम तौर पर नहीं पड़ती, हाँ अगर पोर्टल पर स्टेटस “e-KYC pending” दिखे तो फौरन कर लीजिए।

किस्त न आए तो कारण और समाधान

अब मान लीजिए स्टेटस चेक किया और पता चला कि पैसा नहीं आया। घबराइए मत — ज़्यादातर मामलों में कारण छोटा-मोटा और सुलझने वाला होता है। सबसे आम वजह अधूरी e-KYC है, जिसका हल ऊपर बता चुके हैं। दूसरी बड़ी वजह होती है आधार का बैंक खाते से DBT के लिए ठीक से न जुड़ा होना — इसे ठीक करवाने के लिए बैंक जाकर आधार सीडिंग और NPCI मैपिंग चालू करवानी पड़ती है। तीसरी वजह भूमि रिकॉर्ड में गड़बड़ी है, जैसे नाम की स्पेलिंग अलग होना, ज़मीन अब भी किसी और के नाम दर्ज होना, या रिकॉर्ड का सत्यापन बाकी रहना।

इसके साथ यह भी हो सकता है कि आप किसी बहिष्कृत श्रेणी में आते हों — जैसे आयकरदाता या सरकारी पेंशनभोगी — तब किस्त रुकना नियम के मुताबिक ही है। समाधान का सीधा रास्ता यह है: पहले पोर्टल पर अपना स्टेटस और उसमें लिखा कारण ध्यान से पढ़िए, फिर उसी हिसाब से या तो e-KYC पूरी कीजिए, या बैंक में आधार सीडिंग करवाइए, या अपने गाँव के तलाठी/कृषि सहायक से भूमि रिकॉर्ड ठीक करवाइए। ज़रूरत पड़े तो पीएम किसान की हेल्पलाइन और राज्य की कृषि विभाग हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

आधिकारिक पोर्टल और फर्जी वेबसाइट से बचाव

यहाँ एक चेतावनी बहुत ज़रूरी है। इस तरह की योजनाओं के नाम पर ठगी बहुत होती है। कोई फोन करके कहेगा कि किस्त के लिए फीस भरो, कोई मैसेज में लिंक भेजकर आधार-OTP माँगेगा, तो कोई हूबहू सरकारी जैसी दिखने वाली नकली वेबसाइट बनाकर आपकी जानकारी चुरा लेगा। याद रखिए — पीएम किसान और नमो शेतकरी, दोनों में आवेदन या स्टेटस चेक करने का कोई पैसा नहीं लगता। किसी को अपना OTP, बैंक पिन या पूरा आधार नंबर फोन पर मत बताइए।

भरोसे के लिए सिर्फ दो ही पते याद रखिए — पीएम किसान के लिए pmkisan.gov.in और नमो शेतकरी के लिए nsmny.mahait.org। इन्हें खुद टाइप करके खोलिए, किसी अनजान लिंक पर क्लिक करके नहीं। वेबसाइट के पते के आगे “.gov.in” या राज्य सरकार का आधिकारिक डोमेन देख लीजिए। अगर कोई साइट “.com” पर मुफ्त पैसा या तुरंत मंज़ूरी का वादा करे, तो समझ जाइए दाल में कुछ काला है।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर बात इतनी है — महाराष्ट्र का किसान होने का एक बड़ा फायदा यही है कि आपको केंद्र और राज्य, दोनों की मदद एक साथ मिलती है और सालाना ₹12,000 आपके खाते तक पहुँचते हैं। इसके लिए आपको बस तीन चीज़ों पर नज़र रखनी है: e-KYC पूरी रहे, आधार बैंक से DBT के लिए जुड़ा रहे, और भूमि रिकॉर्ड सही हो। समय-समय पर pmkisan.gov.in और nsmny.mahait.org पर जाकर अपना स्टेटस और लाभार्थी सूची देखते रहिए। अगर किस्त अटके तो घबराने के बजाय कारण पढ़कर उसे दूर कीजिए। और सबसे ज़रूरी — किसी झाँसे में मत आइए, जानकारी सिर्फ आधिकारिक पोर्टल पर डालिए। थोड़ी सावधानी ही आपकी मेहनत की कमाई सुरक्षित रखती है।

MahaIndia Live टीम

MahaIndia Live टीम केंद्र व महाराष्ट्र सरकारच्या योजना, शेतकरी अपडेट्स, कागदपत्रे व लाभार्थी माहिती अधिकृत स्रोतांवरून पडताळून सोप्या मराठी व हिंदी भाषेत सादर करते.

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